Diwali Laxmi Mata Ki Aarti दिवाली

lakshmi mata ki aarti

यहाँ आपके द्वारा दिए गए पाठ का हिंदी में मानवीय और मूल रूप से पुनर्लिखित संस्करण है, जो कॉपीराइट मुद्दों से बचने के लिए स्वाभाविक और मौलिक शैली में लिखा गया है, साथ ही इसका सार और जानकारी बरकरार रखी गई है:

दिवाली, विशेष रूप से धनतेरस के दिन, सुबह और शाम माँ लक्ष्मी की आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऊँ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता का पवित्र भजन दीपोत्सव के छह दिनों तक प्रतिदिन गाना चाहिए। हालाँकि, धनतेरस के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। आरती पूरी होने के बाद, तुलसी माता के सामने आरती ले जाना चाहिए और फिर घर के सभी सदस्यों को आरती ग्रहण करनी चाहिए। इस दौरान माँ लक्ष्मी से धन, समृद्धि और सुख की प्रार्थना करनी चाहिए। परंपरा के अनुसार, माँ लक्ष्मी की आरती के समय घंटी नहीं बजानी चाहिए।

दिवाली के अवसर पर माँ लक्ष्मी की आरती करने से जीवन में किसी भी चीज़ की कमी नहीं रहती। यह आरती न केवल सुख-शांति लाती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। माँ लक्ष्मी की आरती को चमत्कारिक माना जाता है, जो भक्तों के जीवन को आलोकित और समृद्ध बनाती है।

श्री लक्ष्मी माता की आरती (Diwali Laxmi Mata Ki Aarti)

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।

मैया तुम ही जग-माता।।

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।

मैया सुख सम्पत्ति दाता॥

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।

मैया तुम ही शुभदाता॥

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।

मैया सब सद्गुण आता॥

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।

मैया वस्त्र न कोई पाता॥

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।

मैया क्षीरोदधि-जाता॥

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।

मैया जो कोई जन गाता॥

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दोहा

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि। हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।

पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे। सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।

सब बोलो लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय।